संस्था की नियमावली
निम्नलिखित नियमावली संस्था के संगठन, सदस्यता, कार्यकारिणी समिति, पदाधिकारियों के अधिकार एवं कर्तव्यों, बैठकों, निधि तथा संस्था के संचालन से संबंधित प्रावधानों को निर्धारित करती है।
संस्था का नाम
संस्था का नाम — “अखिल भारतीय वियाहुत कलवार महासभा”
परिभाषा
सदस्यता
कोई भी महिला एवं पुरुष जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक के होगी तथा जो संस्था के उद्देश्य एवं नियमों का पालन करेंगे, संस्था का सदस्य बन सकते हैं।
सदस्य बनने के लिए आवेदन पत्र देना होगा, जिसकी स्वीकृति या अस्वीकृति कार्यकारिणी समिति द्वारा प्रदान की जाएगी।
संस्था के प्रत्येक सदस्य को 201/- रुपये प्रवेश शुल्क एवं 501/- रुपये वार्षिक सदस्यता शुल्क देना होगा।
सदस्य के प्रकार
संरक्षक सदस्य
एक बार 10001/- रुपये या उससे अधिक राशि देने वाले सम्मानित व्यक्ति इस महासभा के संरक्षक सदस्य मनोनीत किए जायेंगे।
आजीवन सदस्य
इस महासभा को 5001/- रुपये या इससे अधिक राशि दान करने वाले दाता को आजीवन सदस्य मनोनीत किए जायेंगे।
विशिष्ट सदस्य
महासभा को 2001/- रुपये दान करने वाले दाता को विशिष्ट सदस्य मनोनीत किए जायेंगे।
सदस्यता से विमुक्ति
निम्नलिखित दशाओं में सदस्यों की सदस्यता समाप्त की जाएगी —
- स्वयं त्याग पत्र देने पर।
- पागल या मृत्यु होने पर।
- न्यायालय द्वारा दंडित होने पर।
- सदस्यता शुल्क लगातार तीन वर्ष तक नहीं देने पर।
- लगातार तीन बैठकों में बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहने पर।
- समिति द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर।
कार्यकारिणी समिति का गठन
- कार्यकारिणी समिति में पदाधिकारी सहित कुल 19 सदस्य होंगे।
- कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का चुनाव आमसभा द्वारा किया जाएगा।
- कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा। निवृत सदस्य पुनः चुने जा सकते हैं।
- अगर कार्यकारिणी समिति में कोई पद रिक्त होगा तो शेष अवधि के लिए उक्त पद पर किसी सदस्य को मनोनीत कर सकती है, किन्तु वार्षिक बैठक में उसका विधिवत चुनाव करा लेना होगा।
- चुने हुए पदाधिकारी एवं सदस्य अपने पद के अनुरूप कार्य करेंगे।
पदाधिकारियों के कार्य एवं अधिकार
अध्यक्ष
- संस्था के प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता करना।
- कार्यवाही पंजी पर अपना हस्ताक्षर करना।
- किसी विषय पर समान मत होने की स्थिति में अपने निर्णायक मत का उपयोग करना।
- उद्देश्य की पूर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
महासचिव
- संस्था के प्रत्येक बैठक का आयोजन करना।
- संस्था की ओर से पत्राचार करना।
- पंजियों एवं कागजातों को सुरक्षित रखना।
- आय-व्यय का लेखा बैठक में प्रस्तुत करना।
- संस्था के निधि का अंकेक्षण कराना।
- कार्यवाही को कार्यवाही पंजी में लिखना एवं अध्यक्ष से हस्ताक्षर कराकर अपना हस्ताक्षर करना।
- कार्यकारिणी समिति के राय से कर्मचारियों की नियुक्ति एवं बर्खास्तगी के आदेश पारित करना।
- आवश्यकतानुसार अपने पास 5000/- रुपये तक रखना और विशेष खर्च के लिए समिति की बैठक में पास कराकर कार्य करना।
- उद्देश्य की पूर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
कोषाध्यक्ष
- संस्था के आय-व्यय का हिसाब रखना और महासचिव के द्वारा आहूत बैठक में प्रस्तुत करना।
- संस्था के सदस्यता शुल्क, प्रवेश शुल्क, दान, चन्दा आदि प्राप्त कर रसीद देना।
- संस्था के कोष को किसी बैंक या डाकघर में संस्था के नाम से जमा करना।
कार्यकारिणी समिति के अधिकार एवं कार्य
- संस्था की चल एवं अचल सम्पत्ति के उत्तरदायी होगी।
- संस्था के सभी कार्यों का सम्पादन विधिवत करना तथा प्रस्ताव पारित करना।
- शाखा एवं उपशाखा का गठन करना।
- उद्देश्य की पूर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
आम सभा के अधिकार एवं कर्तव्य
- समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का निर्वाचन करना।
- संस्था के आय-व्यय लेखा पर विचार कर स्वीकृति देना।
- उद्देश्य की पूर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
- अंकेक्षक की नियुक्ति करना।
बैठक
- कार्यकारिणी समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह पर होगी।
- आमसभा की बैठक प्रत्येक वर्ष के अप्रैल माह में होगी।
- कार्यकारिणी समिति एवं आमसभा की विशेष बैठक कभी भी बुलाई जा सकती है।
बैठक की सूचना
- आम सभा के बैठक की सूचना 15 दिन पूर्व दी जाएगी।
- आम सभा की विशेष बैठक की सूचना 10 दिन पूर्व दी जाएगी।
- कार्यकारिणी समिति की विशेष बैठक की सूचना 7 दिन पूर्व दी जाएगी।
- कार्यकारिणी समिति की विशेष बैठक की सूचना 4 दिन पूर्व दी जाएगी।
- बैठक की सूचना, सूचना पंजी पर हस्ताक्षर प्राप्त कर या डाक द्वारा दी जाएगी।
प्रार्थित बैठक
दो तिहाई सदस्यों की लिखित मांग पर महासचिव को एक माह के अन्दर बैठक बुलाना होगा।
यदि महासचिव उक्त अवधि के अन्दर बैठक का आयोजन नहीं करते हैं तो आवेदक को अधिकार होगा कि आवेदन पत्र में लिखित विषय के लिए बैठक का आयोजन कर सकते हैं।
कोरम (गणपूर्ति)
प्रत्येक बैठक का कोरम कुल सदस्यों का दो तिहाई बहुमत होगा।
कोरम के अभाव में बैठक स्थगित हो जाएगी और पुनः स्थगित बैठक के लिए कोरम की आवश्यकता नहीं होगी।
आय के स्रोत
- सदस्यता शुल्क एवं प्रवेश शुल्क।
- सरकारी, गैर सरकारी, दान, अनुदान, सहायता।
- अन्यान्य स्रोत से आय।
निधि का अंकेक्षण
- संस्था की आय-व्यय का लेखा नियमित रूप से रखा जाएगा तथा आमसभा द्वारा नियुक्त अंकेक्षक से प्रतिवर्ष अंकेक्षण कराया जाएगा।
- निबंधन महानिरीक्षक अपने विवेक से जब भी चाहे संस्था का अंकेक्षण किसी मान्यता प्राप्त चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट से करा सकते हैं, जिसका शुल्क संस्था द्वारा वहन किया जाएगा।
कोष का संचालन
संस्था के सभी कोष को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में संस्था के नाम पर जमा किया जायेगा, जिसकी निकासी अध्यक्ष, महासचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी।
पंजी का निरीक्षण
संस्था की सभी पंजियाँ निबंधित कार्यालय में जमा रहेगी जहाँ कोई भी सदस्य महासचिव की अनुमति से सदस्य पंजी, लेखा पंजी एवं कार्यवाही पंजी का निरीक्षण कर सकते हैं।
नियमावली में संशोधन
नियमावली में संशोधन आमसभा के 3/5 सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर ही किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई
संस्था पर या संस्था के द्वारा कानूनी कार्रवाई महासचिव के पदनाम से होगी तथा अधिवक्ता की नियुक्ति समिति के सलाह से की जायेगी।
विघटन एवं विघटनोपरान्त सम्पत्ति की व्यवस्था
- संस्था का विघटन संस्था अधिनियम 1860 के धारा-13 के आलोक में सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही किया जायेगा।
- आमसभा के 3/5 सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर ही संस्था का विघटन किया जायेगा।
- विघटन के उपरान्त जो चल एवं अचल सम्पत्ति बचेगी वह किसी सदस्य या गैर सदस्यों में नहीं बांटी जायेगी बल्कि आमसभा की सहमति से समान उद्देश्य वाली संस्था या सरकार को दे दी जायेगी।
आधिकारिक नियमावली
उपरोक्त नियम संस्था की आधिकारिक नियमावली में उपलब्ध विवरण के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। यह पृष्ठ संस्था के सदस्यों एवं आमजन को संस्था की कार्यप्रणाली एवं नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से बनाया गया है।